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मंगलवार, 24 सितंबर 2019

रानू मंडल के सॉन्ग तेरी मेरी कहानी के पीछे का जानिए क्या है सच

रानू मंडल के सॉन्ग तेरी मेरी कहानी के पीछे का जानिए क्या है सच

रानू मंडल के सॉन्ग तेरी मेरी कहानी के पीछे का जानिए क्या है सच

आजकल काफी पॉपुलर हो रहा है सोंग्स तेरी मेरी कहानी जो हिमेश रेशमिया कंपोज किया है और रानू मंडल ने गाया है और हिमेश रेशमिया ने भी साथ में वॉइस दिया है तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं कि सलमान खान का क्या उससे कोई कनेक्शन है या तो कोई हिमेश रेशमिया को सलमान खान ने बोला था कि जानू मंडल से गाना गवाने  के लिए ? आगरा आप सच जानना छाते है  तो पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढ़े इसमें आपका फुल जानकारी मिल जाएगा क्या है उसका पूरा सच
रानू मंडल
Source: JobMahi.in
आप सब जानते हैं कि हिमेश रेशमिया ने इंटरनेट पर सनसनी मचा दी है रानुमंडल को बॉलीवुड में मौका दिया और रानू का हिमेश रेशमिया के साथ गाना रिकॉर्ड करने वाला वीडियो शेयर करके उससे भी ज्यादा वायरल हो गया और दूसरे ऐसे भी बहुत रानू मंडल के वीडियो वायरल हुआ जिसमें जिसको रेलवे फुल फॉर्म पर गाना गाते  वीडियो रिकॉर्ड किया था वह वीडियो भी कभी वायरल हो गए और एक वीडियो

क्या रानू मंडल को गाना गवाने केलिए सलमान खान ने हिमेश को बोलै था जानिए पूरा सच


क्या सलमान खान ने दिया मौका रानू मंडल को गाने का मौका 

रानू मंडल  का इस प्यार का नगमा है जो गाती हुई नजर आ रही है गाना गाते हुए वीडियो वायरल हो रहा था मगर एक आम आदमी को बॉलीवुड में एंट्री करना काफी कठिन होता है पर रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाले  को बॉलीवुड में गाने का मौका एक बड़ी बात है रानू मंडल का मिला तेरी मेरी कहानी सॉन्ग जो आने वाला है उसमें  वौइस् दिया है

रानू मंडल जैसी रेलवे प्लेटफार्म में गाने वाली महिला को सीधे बॉलीवुड के लिए गाना दे करो हिमेश रेशमिया ने सीधे-सीधे लोगों के दिल में जगह बना ली अब इसमें एक नई बात सामने आई है कि अभिनेता सलमान खान के दोस्त हिमेश रेशमिया इस काम में सलमान खान को क्रेडिट  देना नहीं भूले अब बात जगजाहिर है कि हिमेश रेशमिया सलमान खान परिवार तारीफ करते नहीं थकते इमेज ऐसा बताते हैं कि वह संगीत की दुनिया में केवल खान परिवार के चलते हुए है उन्होंने रानू मंडल के साथ गाना रिकॉर्ड करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि
रानू मंडल से गाना गवाना का आईडिया  सलमान भाई के पिता सलीम अंकल की बात से प्रभावित होकर आया  उन्हें सलाह दी थी कि जब  कभी लाइफ में टेलेंटेड इंसान को देखो तो उसे जाने मत देना दो इसी को पालन करते हुए रानू मंडल का  हिमेश ने जैसे वायरल वीडियो को देखा और तब ते किया की उन्हें किसी भी कभी ना कभी गाना गाएंगे
आपको हिमेश रेशमिया सलमान खान और रानू मंडल की यह जानकारी कैसी  लगी अच्छा लगा तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं अच्छा लगे तो अपने दोस्तों को भी जरूर शेयर करें जिससे इसकी जानकारी मिल सके ऐसे ही इंटरेस्टिंग जानकारी टेक जॉब और वायरल न्यूज़ की जानकारी के लिए आप हमसे जुड़ सकते हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते हो और हमारे लाइक पेज को भी लाइक कर सकते हैं धन्यवाद!
सस्टेनेबल डेवेलोपमेंट के लिए चाहिए बेहतर फंक्शनैलिटी और इफेक्टेंस - सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता

सस्टेनेबल डेवेलोपमेंट के लिए चाहिए बेहतर फंक्शनैलिटी और इफेक्टेंस - सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता

सस्टेनेबल डेवेलोपमेंट के लिए चाहिए बेहतर फंक्शनैलिटी और इफेक्टेंस

एजेंडा 2030: सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता
CNN
यदि सरकारें विकास को पूर्ण कार्यसाधकता के साथ न करें तो अक्सर परिणाम अपेक्षा से विपरीत रहते हैं। “कार्यसाधकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि पूर्व में विकास कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा से नहीं हुए हैं” कहना है जस्टिन किलकुल्लेन का जो सीपीडीई (सीएसओ पार्टनरशिप फ़ॉर डिवेलप्मेंट इफ़ेक्टिवनेस) के सह-अध्यक्ष हैं।

जस्टिन कहते हैं कि 1960-1990 के दौरान जो अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान के ज़रिए विकास काम हुआ वह काफ़ी बेअसर रहा। कार्यसाधकता की कमी के कारण ही 'मिलेनीयम डिवेलप्मेंट गोल (एम.डी.जी.)' के लक्ष्य सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित किए जिससे कि 2015 तक विकास कार्य निश्चित दिशा में प्रभावकारी रहे, एवं मूल्याँकन का ढाँचा भी उपयोग में रहे। परंतु 2005 तक अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान के प्राप्तकर्ता देश यह समस्या साझा कर रहे थे कि विभिन्न विकास संस्थाओं के इतने अधिक दौरे हो रहे थे कि असल कार्य बाधित हो रहा था। उदाहरण के तौर पर तानज़ानिया देश में विभिन्न विकास संस्थाओं के एक साल में 3000 से अधिक दौरे हुए।

इसके कारण अनुदान प्राप्तकर्ता देश इन दौरों और दाता की औपचारिकताओं पर अधिक समय लगा रहे थे, एवं असल ज़मीनी विकास कार्य जिससे कि विकास कार्यसाधकता से उनकी जनता लाभान्वित हो, दरकिनार हो रहा था। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान से जो काम हो रहा था उसकी कार्यसाधकता और ज़मीनी प्रभाव, महत्व के विषय बनते गए।

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों के विभाग के अध्यक्ष नाविद हनीफ़ ने सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) से कहा कि, न सिर्फ, अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान का प्रभावकारी ढंग से इस्तेमाल नहीं हो रहा था बल्कि, सतत विकास के किए ज़रूरी आर्थिक निवेश की तुलना में अनुदान काफ़ी कम था। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार सतत विकास लक्ष्य पर पिछले 4 सालों में काम निराशाजनक रहा है। न सिर्फ़ विभिन्न 17 सतत विकास लक्ष्य पर काम अधकचरा एवं असंतोषजनक रहा है बल्कि जो सतत विकास के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश है, उसकी तुलना में अत्यंत कम धनराशि अभी तक इन कार्यों में व्यय हुई है।

महात्मा गांधी ने तिलिस्म मंत्र दिया था कि जब कभी यह संशय हो कि निर्णय जन-हितैषी और सही है कि नहीं, तो सबसे ग़रीब एवं वंचित व्यक्ति को केंद्र में रख कर ईमानदारी से विवेचना करें कि क्या आपका निर्णय उस व्यक्ति के लिए लाभकारी रहेगा?

नाविद हनीफ़ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह सबसे कम विकसित देश के लिए हितकारी हो। हक़ीक़त इसके विपरीत है क्योंकि सबसे कम विकसित देशों की चुनौतियाँ विकराल रूप से बढ़ती जा रही हैं एवं जो साधन-संसाधन उनकी मदद के लिए उपलब्ध हो रहे हैं, वह घट रहे हैं।

नाविद हनीफ़ ने कहा कि सबसे कम विकसित देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान का बड़ा महत्व है परंतु यह सहयोग सिकुड़ता जा रहा है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान में गिरावट उस समय आ रही है जब आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक तनाव गहरा रहे हैं. इस परिप्रेक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपने वादे से मुकर नहीं सकता है। यदि बहुपक्षीय, सामूहिक दायित्व, आपसी साझेदारी और सहयोग, और सतत विकास ‘जिसमें कोई भी न छूट जाए’ में हम विश्वास रखते हैं तो यह ज़रूरी है कि अपने वादे-दायित्व को सम्मान दें।

सतत विकास के लिए आवश्यक है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी सरकारों को जनता जवाबदेह ठहराए कि हर सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप प्रगति है कि नहीं, विशेषकर कि, यह सुनिश्चित करे कि कोई समुदाय विशेष इस प्रगति मॉडल में छूट न रहा हो। जवाबदेही सिर्फ़ सरकारों की नहीं परंतु सतत विकास के सपने को पूरा करने में ज़रूरी हर वर्ग की होनी चाहिये, इसमें निजी वर्ग और जन संगठन भी शामिल हैं. हालाँकि, लोकतान्त्रिक ढाँचे में, जनता के वोट से चुनी हुई सरकारों का दायित्व सर्वोपरि है.

सीपीडीई ने मई 2018 से जून 2019 के दरमियान एक शोध किया, जिसमें जिन 17 देशों ने स्वेच्छा से सतत विकास की मूल्यांकन रिपोर्ट दर्ज की है (वोलुन्ट्री नेशनल रिपोर्ट), वहीँ के 22 जन संगठन शामिल थे. इस शोध से यह तो स्पष्ट है कि हाल में जन संगठनों ने, अंतरराष्ट्रीय विकास अनुदान में कार्यसाधकता तो बढ़ाई है, परन्तु इसका कितना असर राष्ट्रीय नीतियों पर पड़ा यह अस्पष्ट है.

इस शोध में, 73% प्रतिभागियों ने कहा कि उनकी सरकारों ने सतत विकास लक्ष्य को मद्देनज़र रखते हुए, नीतियाँ तो बनायीं हैं परन्तु देश में एक-एजेंसी विशेष को सतत विकास लक्ष्य लागू करने का दायित्व दे दिया गया है. इस शोध में यह भी उजागार हुआ कि राष्ट्रीय प्रक्रिया में जन संगठन से सलाह-मशवरा तो हुआ परन्तु वह अपर्याप्त रहा, यदि यह देखें कि जनता के सरकारी नीतियों में कितने सुझाव शामिल किये गए. सिर्फ 23% प्रतिभागियों ने कहा कि जन संगठन के सुझाव शामिल हुए. 64% शोध-प्रतिभागियों ने कहा कि सतत विकास लक्ष्य के लिए वर्त्तमान में रिपोर्टिंग प्रक्रिया तो है परन्तु कुछ ने कहा कि यह हाल ही में शुरू हुई है.

सीपीडीई के सह-अध्यक्ष जस्टिन किलकुल्लेन ने कहा कि उनका संगठन, सतत विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है. इस शोध के जरिये वह यह दर्शा रहे हैं कि कैसे सतत विकास की ओर, कैसे, हर वर्ग अपनी सहभागिता समर्पित कर सकता है, जिससे कि, सभी की (विशेषकर कि सरकार की) भूमिका और योगदान में सुधार हो.

बॉबी रमाकांत - सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस)

सोमवार, 23 सितंबर 2019

भारतीय अर्थव्यवस्था विकास में अमेरिका कर रहा सहयोग | Bhartiya Arthvyavastha

भारतीय अर्थव्यवस्था विकास में अमेरिका कर रहा सहयोग | Bhartiya Arthvyavastha

भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए मदद कर रहे हैंः अमेरिका

  
भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए उसका सहयोग कर रहे हैंः अमरीका
ABNA
पोम्पिओ का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में मदद के लिए अमरीका, भारत के साथ कड़ी मेहनत कर रहा है।
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि भारत को उसकी अर्थव्यवस्था के विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका, ट्रम्प प्रशासन की हिंद-प्रशांत रणनीति के अन्तर्गत भारत सरकार के साथ कड़ी मेहनत कर रहा है।   पीटीआई के अनुसार अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पिओ ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की यात्रा पर उनके साथ गए संवाददाताओं से एक सवाल के जवाब में कहा कि हमारी हिंद-प्रशांत रणनीति अच्छी तरह से काम कर रही है।  उन्होंने कहा कि यह न केवल उनके लिए बल्कि अमेरिका के लिए भी फलदायी होगी।  पोम्पिओ ने कहा कि हमने इन गठबंधनों को बनते देखा है।  अमरीकी विदेशमंत्री का कहना था कि हम भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के अवसर प्रदान करने के लिए भारत सरकार के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं।  अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पिओ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है कि जब कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर और शुल्क सहित द्विपक्षीय व्यापार के व्यापक मुद्दों पर वार्ता के लिए भारत का दौरा किया था।
ज्ञात रहे कि अमेरिका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने इससे पहले कोलोराडो में कहा था कि सन 2018 में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 142 अरब डॉलर हो गया है।  उन्होंने कहा कि सन 2025 तक इसके 238 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। 
bhartiya-arthvyavastha-americaa

रविवार, 22 सितंबर 2019

मोबाइल फ़ोन से होने वाली बीमारियां | Mobile phone se hone wali bimariyan hindi me

मोबाइल फ़ोन से होने वाली बीमारियां | Mobile phone se hone wali bimariyan hindi me

आपका मोबाइल कर सकता है आपको बीमार

Mobile phone se hone wali bimariyan hindi me

Source : एरिब.आई आर
               अबना

Brief

आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के नतीजे में अलग अलग तरह की बीमारियां सामने आती हैं जो इन्सान की सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकती हैं।
Source: abna
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के नतीजे में अलग अलग तरह की बीमारियां सामने आती हैं जो इन्सान की सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकती हैं।
पिछले कुछ साल और प्रौद्योगिकी के काल में मोबाइल फ़ोन, टैबलेट और लैपटॉप, आज की ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा बन गए हैं। संपर्क के नए साधन अपने साथ अनेक प्रकार की बीमारी भी लाए हैं जो दीर्घावधि में इन्सान के लिए ख़तरनाक हैं।मोबाइल को सोते वक़्त क़रीब रखने के कारण नींद में रुकावट होती है और इसके जारी रहने से अनेक प्रकार की लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों का ख़तरा रहता है।मोबाइल पर बार बार मैसेज लिखने और भेजने से रीढ़ की हड्डी पर बहुत दबाव पड़ता है। चूंकि मैसेज लिखते व भेजते वक़्त व्यक्ति विशेष मुद्रा में होता है जिसका गर्दन और कांधे पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इसी प्रकार रीढ़  की हड्डी के लिए भी अनेक प्रकार की मुश्किलें पैदा हो जाती हैं।डाक्टरों का मानना है कि मोबाइल से निकलने वाली किरणों से त्वचा पर झुर्रियां पड़ती हैं। इन किरणों से त्वचा के सेल मर जाते हैं और इसके नतीजे में त्वचा पर झुर्रिया पड़ती हैं।लैपटॉप, टैबलेट, और टेलीविजन जैसे संपर्क के साधन इन्सान की आंख की रौशनी को कमज़ोर कर देते हैं।शोधकर्ताओं का मानना है कि हाथ में मोबाइल लगातार पकड़े रहने से उंगलियों और हाथ के शिनाओं में सूजन आ जाती है।

शनिवार, 21 सितंबर 2019

http मधु - जानिए मधु शर्मा के बारे में रोचक जानकारियां

http मधु - जानिए मधु शर्मा के बारे में रोचक जानकारियां

http मधु - जानिए मधु शर्मा के बारे में 10 रोचक जानकारियां

मधु शर्मा (अंग्रेजी:Madhu Sharma) एक भारतीय अभिनेत्री हैं, जो अब भोजपुरी फिल्मों मे अभिनय करती हैं। इन्होंने अपनी फिल्मी कैरियर तमिल फिल्मों से शुरु किये हैं। इन्होंने 2 मराठी फिल्म और 4 भोजपुरी फिल्मो मे काम किये हैं।

मधु शर्मा
राष्ट्रीयताभारतीय
जातीयताशर्मा
व्यवसायअभिनेत्री
धार्मिक मान्यताहिन्दू
मधु शर्मा एक लोकप्रिय एक्ट्रेस हैं। मधु शर्मा ने जिन नवीनतम फिल्मों में अभिनय किया है, वे हैं जय हिंद, मां तुझे सलाम, इलाका: द टेरिटरी, हमरा तिरंगा और चैलेंज हैं ऐसी बोहत सी फिल्मों से नाम किया है और खुद को दुनिया में साबित किया है!


http मधु - Madhu Sharma
Wikipedia
भोजपुरी अदाकारा-निर्माता मधु शर्मा ने बैक टू बैक हिट के साथ प्रशंसकों का मनोरंजन किया है। उन्हें आखिरी बार पवन सिंह की 'जय हिंद' में देखा गया था, जो बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सफलता थी।
एक तमिल फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री, वर्तमान में सबसे अधिक भुगतान पाने वाले भोजपुरी सितारों में से एक है। ईटाइम्स के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, मधु ने भोजपुरी उद्योग में काम करने की चुनौतियों के बारे में खोला, 


“मैंने भोजपुरी फिल्मों का निर्माण शुरू कर दिया है क्योंकि मेरा मानना ​​है कि इस उद्योग को विकसित करने की एक विशाल क्षमता है। कुछ लोगों की इंडस्ट्री के बारे में नकारात्मक सोच है, लेकिन मैं ऐसी फिल्में बनाना चाहता हूं जो सभी का मनोरंजन कर सकें। मैं एक ऐसी परियोजना का निर्माण करना चाहता हूं जो एक दिन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करेगी।
मधु ने बॉलीवुड स्टार अजय देवगन के साथ टीम बनाने की अपनी इच्छा का भी खुलासा किया, उन्होंने कहा, “अजय देवगन के साथ काम करना मेरा सपना है क्योंकि वह बचपन से मेरे पसंदीदा हैं। 'फूल और काँटे' में उनका अभिनय देखने के बाद मुझे उनसे प्यार हो गया। "

अभिनेत्री अक्सर अपनी फिल्मों और फैशनेबल लुक के साथ सुर्खियों में रहती हैं। वह कई हिट भोजपुरी फिल्मों जैसे 'दुल्हे राजा', 'योध्धा', 'गुलामी', 'मां तुझे सलाम' और 'जय हिंद' का हिस्सा रही हैं।

http मधु - Madhu Sharma
flickr

फिल्मोग्राफी

साल फिल्म रोल भाषा नोट
1998गुरु  पारवे सोनालीतमिल
2003हम हैं प्यार में हिंदी 
2005देट इस पाण्डु सुंदरी तेलुगु 
2005अधिरिन्देया चन्द्रम तेलुगु
2005स्लोकन तेलुगु
2005गौतम एस एस सी तेलुगु
2005उग्रा नरसिम्हा कन्नडा
2006पार्टी मधु तेलुगु
2006पूर्णमि मोहिनी तेलुगु
2006हनुमंथु सत्यवती तेलुगु
2007ट्रेफिक सिग्नल हिंदी 
2007तवम तमिलस्पेशल 
2007ब्रह्मा  - दी क्रेयटर तेलुगु
2009युवाह कन्नडा
2009सिंधने से गायत्री तमिल
2013एक दूजे के लिए भोजपुरी
2013दूल्हे राजा भोजपुरी
2014छपारा की प्रेम कहानी भोजपुरी
2014वाढदिसाच्या हार्दिक सुविच्चर मेधा कुड़मुड़ेमराठी 
2014योद्धा भोजपुरीप्रोड्यूसर भी
2015ग़ुलामी भोजपुरीप्रोड्यूसर भी
2016खिलाड़ी भोजपुरीप्रोड्यूसर भी
2017चलेंगे भोजपुरीप्रोड्यूसर भी
2018माँ  तुझे सलाम पूजा आयत खानभोजपुरी
2019जय  हिन्द भोजपुरी[6]


अवार्ड्स 

  • बेस्ट एक्ट्रेस इन सबरंग  2016.
  • बेस्ट एक्ट्रेस इन BIFA (Mauritius) 2015.[7]
  • बेस्ट एक्ट्रेस फॉर ग़ुलामी (2015 film) in IBFA (Dubai) 2016.[8]
  • बेस्ट एक्ट्रेस इन दादा साहेब फाल्के 2016.[9]

http मधु
Source : Wikipedia & Etimes